शोभित जैन

दिल को रौंदते हैं जो हर रोज़ पैरों तले ,

उन्हें आज भी फूल के टूटने पर दर्द होता है !!

शोभित जैन

मिलो तो सीने में समां जाना, ज़माने को भूलकर ,

कब से मेरी बाँहों का घेरा उदास है ||

शोभित जैन

हसरत मुद्दतों से है कि अपना भी परिवार हो ....

साथ में हो अपनी "परी " और अच्छा सा "BAR" हो ||

शोभित जैन
तेरी इनायतों का कहाँ तक हिसाब करें 'शोभित'
बेनाम आंसू थे, तूने नाम दे दिया ||
शोभित जैन
अश्कों के हर कतरों को पलकों में छिपाते हैं ,
हम वो शख्स हैं जो मायूसी में मुस्काते हैं !!
कोई लाख सितम ढाए तो फर्क नहीं पड़ता ,
हम तो रौशनी का त्यौहार भी अमावस्या को मानते हैं !!!
शोभित जैन
बेपरवाह हैं वो अपने हुनर की कीमत से,
बस यही एक चीज़ उन्हें नायाब बना देती हैं ||
शोभित जैन
दिल फिर से धडकने को तैयार ना होता ,
नज़रें जो ना मिलती , तो प्यार ना होता

कुछ तो खता है, तेरी खामोश रजामंदी की भी,
वरना इश्क का भूत, सर पे सवार ना होता

उँगलियों की उलझन का काला जादू चल गया,
भला-चंगा बंदा भला फिर यूं बेजार ना होता

तिरछी निगाहों का घाव है , भरते भरते भरेगा ,
तलवार से मारा होता तो इतना असरदार ना होता

डाक्टर से दोस्ती अब उम्र भर निभानी है ,
कुछ और कहती लकीरें, तो मैं बीमार ना होता