शोभित जैन
जुदाई ही मुकद्दर है तो इतनी दूरी भी देना, खुदा
मैं अगर तडपूं तो उसे दर्द ना हो
!!
शोभित जैन
मेरे अश्कों की कीमत वो जानती है, तभी
हर रोज़ मुझे ये कीमती सौगात देती है ....
शोभित जैन
एक जाये दूजा आ जाये

हैं जी के जंजाल बहुत ॥

मैं कैसे तुझसे प्यार करूँ ??


पेट्रोल संग प्याज रुलाये ,

महंगी हो गयी दाल बहुत ॥

मैं कैसे तुझसे प्यार करूँ ??


चैन के दो पल मयस्सर नहीं

सर पे सवार हैं काल बहुत ॥

मैं कैसे तुझसे प्यार करूँ ??



ऐसा नहीं वैसा होता ,

दिल में हैं सवाल बहुत ॥

मैं कैसे तुझसे प्यार करूँ ??
शोभित जैन
जब इंतज़ार बेसबर होता है ,
प्यार और भी मुखर होता है ||

शोभित जैन
जब इंतज़ार ही सफ़र होता है ,
हौले-हौले दिल पत्थर होता है ||
शोभित जैन
जिसे खोजने में ज़माने लगे ,
उसके ख्वाब अब डराने लगे १

वैसे मिलना तो अब मुनासिब नहीं रहा,
पर वो खवाबों में आने-जाने लगे २

आरजू, इजहार, उम्मीद औ मोहब्बत,
खुद, कहीं गहरे दफ़नाने लगे ३

तराशा था हर नगीना, एहतियात से ,
आज खाली सब खज़ाने लगे ४

दर्द आखों से होकर, कागज़ पर बिखर गया,
वो बेफिक्र होकर गुनगुनाने लगे ५
शोभित जैन
तुमने मेरे सपनों को समझा ,
मेरे करीबी , अपनों को समझा !!

पैदाइशी फितरत को समझा ,
तारे, राशी , नक्षत्र को समझा !!

खामोश उदासी, तन्हाई को समझा ,
ज़माने की रुसवाई को समझा !!

सीमायें समझी , हक को समझा ,
फ़िज़ूल सी बक-बक को समझा !!

एक बेचारा दिल बच गया ,
जिसको छोड़कर सबको समझा !!