शोभित जैन

ब्लॉगजगत के कारण काफी दिनों से बहुत ही खूबसूरत रचनाएं, नज्में और गज़लें पढने को मिल रही हैं...पर जब भी मेरे जेहन में एक छोटी सी कविता कोंधती है, जो मुझे चार छोटी-छोटी प्यारी सी बच्चियों ने अपनी तोतली जुबान में सुनायी थी तो मैं यह सोचकर दंग रह जाता हूँ कि इतनी गहरी बात इतने सरल शब्दों में कोई कैसे लिख सकता है हो सकता है कि इसको पढने के बाद आप भी मेरे विचार से सहमत हों :-


एक था राजा, एक थी रानी..

दो थे बच्चे, एक थी नानी.....

राजा मारा लडाई में....
रानी मरी कढाई में....

नानी मरी रजाई में....

और बच्चे मरे पढाई में.....
7 Responses
  1. वाह भाई मज़ा आ गया।


  2. सही है ... बहुत सुंदर।



  3. machhali jal ki rani hai jaisee hi yah kavita bhi --- bahut se bachchon ne apne bachpan mein gayi hai..mujhey bhi yaad hai yah kavita..arsey baad suni...dhnywaad


  4. Shobhit ji
    Bachpan ki yaad aa gayee, achaa laga.
    Aap kaise hain, main kuch dino ke liye bahar jaa raha hun 15 ko vapas aane par milte hain.


  5. wah wah....
    if you want to write ture you need to be a 'kid'.

    to 'tobit ti' meli talap te apto it ratna te liye 'ratna(i lube yu ratna)'

    if u r able to understand the above it's fine else 'gmail'

    waise mera adversitement agency sahi chal rahi hai(pehle phir 'tomato ketchup' fir 'airtel' fir 'rasna')
    :)


  6. waise ab:
    raja 'recent poll main'
    rani 'figure control main'

    nani 'saas bahu obsession main'
    aur bacche 'recession main'
    zayada mar rahe hai....


    (I know, Bad joke as usual)


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