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द&#
शोभित जैन
क्रिसमस और नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ २००९ की आखिरी पेशकश :


जिम्मेदारी का पाउडर डाल, ज़माने की मशीन में घुमाया भी,
चितवन की धुप, गेसुओं की हवा में सुखाया भी,
'अधूरेपन' के जिद्दी दाग से पीछा छुड़ा नहीं पाया,
ज़िन्दगी, तेरा रंग कुछ उड़ा-उड़ा लगता है !!!

ग़ज़लों-शेरों की आंच पर तपाया भी,
विदेशी मसालों का तड़का लगाया भी,
"सुकूँ" को नमक बनाके पर मिला नहीं पाया,
ज़िन्दगी, तेरा स्वाद कुछ फीका फीका लगता है !!!

ममता की माटी के नीचे दबाया भी,
यार-दोस्ती का खाद-पानी पिलाया भी,
"नूर-ए-मुहब्बत" पर मैं दिखा नहीं पाया,
ज़िन्दगी, तेरा पौधा कुछ सूखा सूखा लगता है !!!
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द&#
शोभित जैन
शाम के चार बजे , दिल के तार बजे ...

हर ध्वनि लगे शहनाई
मन मधुवन में मचले अमराई
नवंकृत हो मचले तरुणाई
रहस्यमयी मुस्कान अधरों पर सजे...
शाम के चार बजे, दिल के तार बजे ...

रुनझुन
-रुनझुन करती धड़कन ,
सांसों में है अपनापन,
दिल दिमाग में चलती अनबन,
प्राण जा कहीं और बसे...
शाम के चार बजे , दिल के तार बजे ...

रातें
हो गयीं गुमसुम-गुमसुम
हो गए सारे हवास भी गुम,
जाने कौन हो कहाँ हो तुम ?
जिससे मिलने मनवा तरसे
शाम के चार बजे , दिल के तार बजे ...

शाम के चार बजे , दिल के तार बजे ...

(
हिंदी से प्रेम करने और हिंदी में प्रेम करने का एक प्रयास .. )
लेबल: 7 टिप्पणी |
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द&#
शोभित जैन
कुछ समय पहले एक फिल्म देखी थी "लव आजकल" तो सोचा उसी फिल्म को अपने शब्दों में अपने ब्लॉग पर रिलीज़ किया जाये ....वैसे भी आजकल रीमेक का समय चल रहा है तो क्यूँ ना हम भी अपने हाथ आजमां लें ...अपने अंदाज़ में .....बस उस फिल्म और इस फिल्म में इतना ही अंतर है की उसमें दो कहानियों के दो अलग अलग हीरो थे ...और इसमें दोनों के लेखक और हीरो एक ही हैं जो "Love कल" की खोज में हैं पर जिंदा रहने के लिए "Love आज" से दिल बहला रहें हैं ...

Love आज :-
लड़कियां छेड़ते नहीं, हम पटाने के लिए
बस कुछ किस्से बनाते हैं, दोस्तों को सुनाने के लिए


तस्वीरें किसी की दिल में आज कौन रखता है
फिर भी तस्वीर तेरी चाहिए, पर्स में लगाने के लिए

लबों पर उसका नाम आया नहीं अचानक
एक शिगूफा छेड़ा था, तुझे जलाने के लिए

रूठना तो हुस्न की अदा है और हक भी
हजारों तरीके हम भी रखते हैं, मनाने के लिए

(तो यह है जनाब आज का Love जिसने "Emotions " को अत्याचार और इश्क को कभी "कमबख्त" तो कभी "कमीना" बना दिया .... अब चलतें है उस उस दौर की तरफ जहाँ इश्क को इबादत मानकर जिया जाता था ....)

Love कल :-
तबियत भी ठीक थी , दिल भी बेकरार था
वो वक्त और था, जब किसी से प्यार था !
होश में रहते थे हम , आँखों में यूं खुमार था
अदायों से अनजान थे , पागलो में शुमार था !!
वो वक्त और था .....

बेसब्र तो पहले भी बहुत थे हम ,
हर वक्त किसी का यूं इंतज़ार था
तसवीरें भी बहुत देखी थी मगर ,
हर तस्वीर के लिए दिल दीवार था !!
वो वक्त और था .....

बात निगाहों से होकर दिल तक पहुँचेगी,
इल्म इसका हमको सरकार था !
खता होनी थी सो हो गई निगाहों से ,
दोनों में कोई कसूरवार था !!
वो वक्त और था...

वो वक्त और था , जब किसी से प्यार था .............