शोभित जैन
महकता बगीचा ...मिटटी के घर के पिछवाड़े में...
खुश्बू फैलती है ...बड़े से बरामदे के हर कोने तक
और घर के बाहर
भी..

गुलाब ,जूही , लिली.. हर किस्म का फूल
रखता है इसे खुश्बूनुमा , दिन भर

अफ़सोस ....
सिर्फ दिन भर ...

रात को महकने के लिए ..
इसे आज भी '
रातरानी' का इंतज़ार है ...
.......................................इसको भी !!
4 Responses
  1. सुन्दर रचना...शुभकामनाएं।



  2. सच कहा है शोभित जी ... रात रानी ही बस अकेली रात की संगिनी है .....


  3. ana Says:

    shabda vyanjanaa ati sundar..............


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