शोभित जैन


पूरी बस्ती, हर मंजर , हर नज़ारा धुला सा है
और साँस लेने को सारा , आसमा भी खुला सा है
फिर जाने किस याद में साँस मेरी जमी सी है....
सब कुछ है यहाँ , पर शायद कुछ कमी सी है ................

जन्नत के सुख कदमों पर है , और अरमान सारे बाहों में
कामयाबी का भी हर रास्ता बिछा हुआ है राहों में
फिर क्यों आंखों की कोरो में ठहरी कुछ नमी सी है ....
सब कुछ है यहाँ , पर शायद कुछ कमी सी है ................

उल्लास के आधार पर दिन जाते हैं गुजरते ,
और रात के स्वपन सारे , मखमली गद्दों पर लरजते
फिर धड़कन में क्यों बैचेनी जमी सी है ...
सब कुछ है यहाँ , पर शायद कुछ कमी सी है ................


कमी शायद उन रिश्तों की है जो हमारी जान हैं ,
ये बात उन रिश्तों की है , जो इंसान की पहचान हैं ...
वो रिश्ते जिसमे एक माँ बिन कारन भूखी रहती है ,
और बाप का गला रुधता पर आँखें सूखी रहती हैं....
दिन, महीने, और घंटे गिनती , रिश्ता उस बहन से है
अपनेपन का अहसास दिलाता , रिश्ता इस वतन से है
दोस्तों के ठहाकों से रिश्ता, रिश्ता सजती महफ़िल से ,
और लौटने की (विदेश से) दुआ मांगता , रिश्ता है हर एक दिल से
पैर छूते छोटो से रिश्ता , आशीष देते बड़ों से है ,
और सबसे बढ़कर के रिश्ता , रिश्ता अपनी जड़ो से है

दुआ मांगता हूँ में रब से , इन रिश्तों को में भूल न जाऊं
और टूटकर अपनी जड़ से , सदा के लिए दूर न जाऊँ


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5 Responses
  1. Abhishek Says:

    साँस लेने को सारा , आसमा भी खुला सा है
    सब कुछ है यहाँ ,पर शायद
    कुछ कमी सी है ................
    खूब लिखा है आपने. शुभकामनाएं और स्वागत मेरे ब्लॉग पर भी.
    (Pls remove unnecessary word verification).


  2. दुआ मांगता हूँ में रब से , इन रिश्तों को में भूल न जाऊं
    और टूटकर अपनी जड़ से , सदा के लिए दूर न जाऊँ

    बहुत खूब लिखा है, अपनी ज़मीन, अपने घोंसले से तो पंच्छी भी दूर नही रह पाता
    इंसान की मजबूरियों का तो खुला संसार है


  3. shama Says:

    Saarehi rachna sundar hai par aakharee do panktiyan to sonepe suhaga...!
    Gar bura na mano to ek sujhaw dun? "jannat" ye shabd sahee hai, naki "zannat"...bura to nahee mana ?
    Mere blogpe aaneka ek snehil nimantran !


  4. leo Says:

    good man keep going ...it seems somebody is missing the home... well it was awesome and the selection of words is great but critically i believe the title was not supposed to be "kabhi kabhi" kind it reminds that famous song.. its ok but personally i believe the title was not original and it didn't match with the content...
    in all good creation..


  5. आपने बहुत अच्छा लिखा है ।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com


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